Sunday, 24 May 2020
उम्मीद
उम्मीद: उम्मीद दिन भर का थका हारा सुखिया जैसे ही अपनी झोपड़ी में घुस ही रहा था कि पीछे से आवाज़ आयी “सुखिया, अभी हवेली चल,मुखिया जी के बेटे का जन्मदिन है शहर से बड़े बड़े लोग आ रहे है, बहुत काम है, बाबू …
Thursday, 19 March 2020
एक विनती एक निवेदन आप सभी से कृपया जितना संभव हो घर पर रहे, जहाँ भीड़भाड़ हो वहाँ जाने से बचें, किसी कारणवश अगर आप को बाहर जाना पड़ता है तो लोगो से दूरी बना कर रहे, हर 2 घंटे में हाथ धोए।
आँख, नाक, मुँह छूने से बचे। जब भी बाहर जाए मास्क लगाए एवं ग्लब्स पहने, बाहर से आने के बाद सबसे पहले हाथ धोयें तब ही किसी चीज़ को हाथ लगाए।
घबराए नही थोड़ी एहतियात बरते और साफ़ सफाई का ध्यान रखे तो आप कोरोना को मात दे सकते है, भ्रमित करने वाले सभी मैसेज से बचे अभी तक ऐसी कोई दवा नही बनी जो इस बीमारी से लड़ पाए, आप को अपनी इम्युनिटी पावर को बढ़ाना होगा यही एक ऐसा उपाय है जिस से कोरोना या कोई भी ऐसा वाइरस शरीर पर प्रभाव नही डालता।
हमें प्रकृति से कुछ अनमोल उपहार मिले है जिनको रोजमर्रा अपने खाने पीने में शामिल करते है तो इम्युन सिस्टम को बूस्ट कर सकते है, इसमें अदरक, लहसुन, काली मिर्च, हल्दी, दालचीनी, तुलसी, जायफल मुख्य है...आप इन सभी सामग्रियों को पानी में उबाल कर चाय की तरह पिये, इम्युनिटी तो बढ़ेगी ही साथ ही इंफेक्शन से भी दूर रहेंगे।
अगर हम सतर्कता नही बरतेंगे तो स्थिति और भयावह होती जाएगी, सोचिए अगर ये वाइरस फैलता जाए तो क्या क्या हो सकता है, लोगो को इसके बारे में बताये ये सुरक्षा उनके और उनके परिवार के लिए है, मिलियन्स कमाने वाली बड़ी बड़ी कंपनियां लॉस में जा रही है, लोग घर से काम करने के लिए मजबूर है, मॉल, सिनेमा, रेस्टोरेंट, होटल्स, दुकानें,स्कूल, कॉलेज आदि सभी बंद कर दिए गए, अगर ये सब कुछ पहले की तरह नॉर्मल नही हुआ तो इसका हमारी अर्थव्यवस्था क्या प्रभाव पड़ेगा??
लोगो की नौकरियां जाएंगी, पैसे नही होंगे तो खाना कहाँ से मिलेंगा, हॉस्पिटल में बेड की कमी होगी तो पेशेंट तो बिना इलाज के ही मौत की मुँह में जाएगा, बच्चो की शिक्षा उनकी सुरक्षा सब कुछ ख़तरे में है, आप को, हम सभी को...पूरे विश्व को इस भयावह स्थिति से बाहर निकालने का प्रयास करना होगा, सरकार हमारी स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए जो भी उचित कार्य है वो कर रही है लेकिन असल ज़िम्मेदारी हमारी है, हमें ध्यान रखना होगा, आसपास लोगो को जागरूक करना होगा..आइए..आह्वान करते है, लोगो को जागरूक करते है, जीवन अमुल्य है आप का जीवन आप के हाथ मे है,अगर अब भी ना संभले तो इटली के बाद हमारा नंबर होगा..साफ़ सफाई का ध्यान रखे, सतर्क रहें और स्वास्थ्य रहे।
अनामिका अनूप तिवारी
नोएडा
आँख, नाक, मुँह छूने से बचे। जब भी बाहर जाए मास्क लगाए एवं ग्लब्स पहने, बाहर से आने के बाद सबसे पहले हाथ धोयें तब ही किसी चीज़ को हाथ लगाए।
घबराए नही थोड़ी एहतियात बरते और साफ़ सफाई का ध्यान रखे तो आप कोरोना को मात दे सकते है, भ्रमित करने वाले सभी मैसेज से बचे अभी तक ऐसी कोई दवा नही बनी जो इस बीमारी से लड़ पाए, आप को अपनी इम्युनिटी पावर को बढ़ाना होगा यही एक ऐसा उपाय है जिस से कोरोना या कोई भी ऐसा वाइरस शरीर पर प्रभाव नही डालता।
हमें प्रकृति से कुछ अनमोल उपहार मिले है जिनको रोजमर्रा अपने खाने पीने में शामिल करते है तो इम्युन सिस्टम को बूस्ट कर सकते है, इसमें अदरक, लहसुन, काली मिर्च, हल्दी, दालचीनी, तुलसी, जायफल मुख्य है...आप इन सभी सामग्रियों को पानी में उबाल कर चाय की तरह पिये, इम्युनिटी तो बढ़ेगी ही साथ ही इंफेक्शन से भी दूर रहेंगे।
अगर हम सतर्कता नही बरतेंगे तो स्थिति और भयावह होती जाएगी, सोचिए अगर ये वाइरस फैलता जाए तो क्या क्या हो सकता है, लोगो को इसके बारे में बताये ये सुरक्षा उनके और उनके परिवार के लिए है, मिलियन्स कमाने वाली बड़ी बड़ी कंपनियां लॉस में जा रही है, लोग घर से काम करने के लिए मजबूर है, मॉल, सिनेमा, रेस्टोरेंट, होटल्स, दुकानें,स्कूल, कॉलेज आदि सभी बंद कर दिए गए, अगर ये सब कुछ पहले की तरह नॉर्मल नही हुआ तो इसका हमारी अर्थव्यवस्था क्या प्रभाव पड़ेगा??
लोगो की नौकरियां जाएंगी, पैसे नही होंगे तो खाना कहाँ से मिलेंगा, हॉस्पिटल में बेड की कमी होगी तो पेशेंट तो बिना इलाज के ही मौत की मुँह में जाएगा, बच्चो की शिक्षा उनकी सुरक्षा सब कुछ ख़तरे में है, आप को, हम सभी को...पूरे विश्व को इस भयावह स्थिति से बाहर निकालने का प्रयास करना होगा, सरकार हमारी स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए जो भी उचित कार्य है वो कर रही है लेकिन असल ज़िम्मेदारी हमारी है, हमें ध्यान रखना होगा, आसपास लोगो को जागरूक करना होगा..आइए..आह्वान करते है, लोगो को जागरूक करते है, जीवन अमुल्य है आप का जीवन आप के हाथ मे है,अगर अब भी ना संभले तो इटली के बाद हमारा नंबर होगा..साफ़ सफाई का ध्यान रखे, सतर्क रहें और स्वास्थ्य रहे।
अनामिका अनूप तिवारी
नोएडा
Tuesday, 28 August 2018
मेरी सुबह
ट्रिंग ट्रिंग..
उफ़..घडी का ये इरिटेटिंग अलार्म...मुझे सुबह की नींद से उठाने के लिए काफ़ी था, आँखों को मसलते हुए उठी, पांच बज़ रहे थे साढ़े छह बजे बच्चो की बस आ जाती है, इन डेढ़ घंटो में मेरे हाथ मशीन की तरह और दिमाग़ कंप्यूटर की तरह चलते है, जल्दी जल्दी बच्चो को उठाना और एक एक करके तैयार करना, बैग पैक, टिफिन पैक और सबसे बड़ा टेंशन जो हर सुबह होती है आयुष का हर दिन का प्रोजेक्ट वर्क से रिलेटेड सामान जो उसे सुबह स्कूल जाने के वक्त याद आता है "आयुष ये सब तुम मुझे कल नहीं बता सकते, अभी दस मिनट में बस आ जायेगी, कहाँ से लाऊ अब ये सारी चीज़ें" मैंने गुस्सा करते हुए बोला।
" माँ आप जल्दी करो वरना स्कूल में डाट तो मुझे पड़ेंगी" मेरी बातों को अनसुना कर अपनी बातो में मुझे उलझा लिया, किसी तरह सभी सामान इकठ्ठा किया " बच्चे तैयार हो गए, लाओ मैं छोड़ देता हूं बस स्टॉप तक" अखिल कमरे से बाहर निकलते हुए बोले " क्या बात है जनाब, बहुत जल्दी उठ गए थोड़ा और सो लेते, छोड़ने का काम भी मैं कर लुंगी बच्चे तो मेरे अकेले के है तो बच्चो के प्रति सारी जिम्मेदारी भी मेरी हुई ना" मैंने अखिल को ताना मारते हुए कहा ।
सारा और आयुष मेरी बात सुनकर हंसने लगे "अरे तुम लोग हंसो नहीं, माँ इस वक्त माँ नहीं रानी लक्ष्मी बाई है, सुबह सुबह माँ से पंगे नहीं लेते बल्कि माँ की हर बात मानते है" अखिल की बात सुन मैं भी हंस पड़ी।
बच्चो के स्कूल जाने के बाद अब अखिल की बारी थी ऑफिस जाने की।
जल्दी जल्दी नाश्ता और टिफिन तैयार किया और अखिल भी ऑफिस के लिए निकल गए, मैं थक कर चूर हो गयी थी वही सोफे पर निढाल हो गयी तभी घड़ी पर नज़र गयी आठ बज़ रहे थे, मैं चौंक कर उठ बैठी और फ़ोन ढूंढने लगी, फ़ोन तो मिल गया पर उसका फ़ोन नहीं लग रहा था, मन में अज़ीब अज़ीब से ख्याल आने लगे, ऐसा तो कभी नहीं होता उसका फ़ोन तो हमेशा ऑन रहता है, कुछ मैसेज भी नहीं है, इस समय तो उसे मेरे घर पर आ जाना चाहिए ,अखिल के जाते ही उसके लिए दरवाज़ा खोलती हूं और आज अखिल को ऑफिस गए 20मिनट हो गए और उसका कुछ पता ही नहीं।
फिर फ़ोन मिलाया अभी भी फोन स्वीच ऑफ आ रहा था, " हे भगवान मैं आज लड्डू का भोग लगाउंगी प्लीज़ उसे जल्दी भेज दो" हाथ जोड़ते हुए मैंने कहा, उसके बिना ये सब काम कैसे होगा, कैसे करुँगी मैं ये सभी काम "प्लीज़ भगवान प्लीज भेज दो उसे"
वो एक दिन भी ना आये तो मेरा पूरा दिन ख़राब हो जाता है उसके आते ही जो आत्मिक शांति मुझे मिलती है किसी और से आज तक नहीं मिली चाहे वो अखिल ही क्यों ना हो।
सोचते सोचते साढ़े नौ बज़ गए अब मेरे सब्र का बाँध टूटने वाला था आँखों के कोरे में आंसुओ ने अपनी दस्तक दे दी थी तभी डोर बेल बज़ी सहसा मुझे मेरे कानों पर यकीन नहीं आया तभी फिर बेल की आवाज़ आयी मैंने फोन एक तरफ फेंक कर लगभग भागते हुऐ दरवाज़ा खोला, " क्या मैडम सो गयी थी क्या,कब से घंटी पर घंटी बजा रही हूँ और तुम हो की दरवाज़ा ही नहीं खोल रही, अभी नहीं खोलती तो मैं तो वापस जाने वाली थी" उसकी ये तीखी आवाज़ भी मुझे अभी कर्णप्रिय लग रही थी, मैंने झट से उसे गले से लगा लिया " अरी शांता, नाराज़ क्यों होती है सामान समेट रही थी इसलिए घंटी की आवाज़ नहीं सुनी, चल तू अपना काम ख़त्म कर मैं तेरे लिए अदरक वाली चाय बनाती हूँ'
उसको शांत करते अपनी ख़ुशी छुपाते हुए मैंने कहा।
लेखिका
अनामिका अनूप तिवारी
उफ़..घडी का ये इरिटेटिंग अलार्म...मुझे सुबह की नींद से उठाने के लिए काफ़ी था, आँखों को मसलते हुए उठी, पांच बज़ रहे थे साढ़े छह बजे बच्चो की बस आ जाती है, इन डेढ़ घंटो में मेरे हाथ मशीन की तरह और दिमाग़ कंप्यूटर की तरह चलते है, जल्दी जल्दी बच्चो को उठाना और एक एक करके तैयार करना, बैग पैक, टिफिन पैक और सबसे बड़ा टेंशन जो हर सुबह होती है आयुष का हर दिन का प्रोजेक्ट वर्क से रिलेटेड सामान जो उसे सुबह स्कूल जाने के वक्त याद आता है "आयुष ये सब तुम मुझे कल नहीं बता सकते, अभी दस मिनट में बस आ जायेगी, कहाँ से लाऊ अब ये सारी चीज़ें" मैंने गुस्सा करते हुए बोला।
" माँ आप जल्दी करो वरना स्कूल में डाट तो मुझे पड़ेंगी" मेरी बातों को अनसुना कर अपनी बातो में मुझे उलझा लिया, किसी तरह सभी सामान इकठ्ठा किया " बच्चे तैयार हो गए, लाओ मैं छोड़ देता हूं बस स्टॉप तक" अखिल कमरे से बाहर निकलते हुए बोले " क्या बात है जनाब, बहुत जल्दी उठ गए थोड़ा और सो लेते, छोड़ने का काम भी मैं कर लुंगी बच्चे तो मेरे अकेले के है तो बच्चो के प्रति सारी जिम्मेदारी भी मेरी हुई ना" मैंने अखिल को ताना मारते हुए कहा ।
सारा और आयुष मेरी बात सुनकर हंसने लगे "अरे तुम लोग हंसो नहीं, माँ इस वक्त माँ नहीं रानी लक्ष्मी बाई है, सुबह सुबह माँ से पंगे नहीं लेते बल्कि माँ की हर बात मानते है" अखिल की बात सुन मैं भी हंस पड़ी।
बच्चो के स्कूल जाने के बाद अब अखिल की बारी थी ऑफिस जाने की।
जल्दी जल्दी नाश्ता और टिफिन तैयार किया और अखिल भी ऑफिस के लिए निकल गए, मैं थक कर चूर हो गयी थी वही सोफे पर निढाल हो गयी तभी घड़ी पर नज़र गयी आठ बज़ रहे थे, मैं चौंक कर उठ बैठी और फ़ोन ढूंढने लगी, फ़ोन तो मिल गया पर उसका फ़ोन नहीं लग रहा था, मन में अज़ीब अज़ीब से ख्याल आने लगे, ऐसा तो कभी नहीं होता उसका फ़ोन तो हमेशा ऑन रहता है, कुछ मैसेज भी नहीं है, इस समय तो उसे मेरे घर पर आ जाना चाहिए ,अखिल के जाते ही उसके लिए दरवाज़ा खोलती हूं और आज अखिल को ऑफिस गए 20मिनट हो गए और उसका कुछ पता ही नहीं।
फिर फ़ोन मिलाया अभी भी फोन स्वीच ऑफ आ रहा था, " हे भगवान मैं आज लड्डू का भोग लगाउंगी प्लीज़ उसे जल्दी भेज दो" हाथ जोड़ते हुए मैंने कहा, उसके बिना ये सब काम कैसे होगा, कैसे करुँगी मैं ये सभी काम "प्लीज़ भगवान प्लीज भेज दो उसे"
वो एक दिन भी ना आये तो मेरा पूरा दिन ख़राब हो जाता है उसके आते ही जो आत्मिक शांति मुझे मिलती है किसी और से आज तक नहीं मिली चाहे वो अखिल ही क्यों ना हो।
सोचते सोचते साढ़े नौ बज़ गए अब मेरे सब्र का बाँध टूटने वाला था आँखों के कोरे में आंसुओ ने अपनी दस्तक दे दी थी तभी डोर बेल बज़ी सहसा मुझे मेरे कानों पर यकीन नहीं आया तभी फिर बेल की आवाज़ आयी मैंने फोन एक तरफ फेंक कर लगभग भागते हुऐ दरवाज़ा खोला, " क्या मैडम सो गयी थी क्या,कब से घंटी पर घंटी बजा रही हूँ और तुम हो की दरवाज़ा ही नहीं खोल रही, अभी नहीं खोलती तो मैं तो वापस जाने वाली थी" उसकी ये तीखी आवाज़ भी मुझे अभी कर्णप्रिय लग रही थी, मैंने झट से उसे गले से लगा लिया " अरी शांता, नाराज़ क्यों होती है सामान समेट रही थी इसलिए घंटी की आवाज़ नहीं सुनी, चल तू अपना काम ख़त्म कर मैं तेरे लिए अदरक वाली चाय बनाती हूँ'
उसको शांत करते अपनी ख़ुशी छुपाते हुए मैंने कहा।
लेखिका
अनामिका अनूप तिवारी
हम सब अपने चेहरे को खूबसूरत रखने के लिए तमाम जतन करते है, महंगे से महंगे सौंदर्य प्रसाधन का इस्तेमाल करते है जिस से हमारी त्वचा मखमली मुलायम और चमकदार हो, क्या कभी ऐसा ख्याल आया कि काश कोई ऐसी क्रीम आती जिस से हमारा दिल खूबसूरत, मखमली और चमकदार बन जाए? दिल को खूबसूरत बनाने के लिए कोई पैसे नहीं लगते बस निस्वार्थ प्रेम, दया, करुणा, दुसरो के प्रति प्रेम और इज़्ज़त की भावना चाहिए ,आप की दिल की खूबसूरती ही आप के चेहरे की खूबसूरती को सौ गुना बढ़ा देगी।
कभी ये नुस्खा भी आजमाएं, सबसे अलग और सबसे खूबसूरत बन जाए
अनामिका अनूप✍😊
कभी ये नुस्खा भी आजमाएं, सबसे अलग और सबसे खूबसूरत बन जाए
अनामिका अनूप✍😊
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